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बैंगलोर से राजस्थान: धर्म, इतिहास और संस्कृति का एक अविस्मरणीय कार सफर

एक संस्मरण — सतीश जी की कलम से
22 दिन, 4,000+ किलोमीटर और होंडा सिटी की एक यादगार सड़क यात्रा। बैंगलोर से आरंभ होकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पावन धामों, राजसी किलों और मरुधरा के धोरों तक फैली एक संपूर्ण यात्रा-डायरी।

चरण (Phase) तारीख प्रमुख मार्ग (Route) मुख्य पड़ाव व आकर्षण
चरण 1 29-30 अगस्त बैंगलोर → कोल्हापुर → मुंबई चित्रदुर्गा फोर्ट, महालक्ष्मी शक्तिपीठ, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
चरण 2 31 अग – 1 सित मुंबई → दमन → अहमदाबाद कोस्टल रोड व सी-लिंक, दमन बीच, इका क्लब
चरण 3 2-4 सितंबर अहमदाबाद → तरंगा → माउंट आबू → नाथद्वारा तरंगा जैन मंदिर, अंबाजी शक्तिपीठ, अचलेश्वर, श्रीनाथजी दर्शन
चरण 4 5-9 सितंबर चित्तौड़गढ़ → उदयपुर → शेखावाटी अंचल चित्तौड़ किला, खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, रानी सती धाम
चरण 5 10-14 सितंबर बीकानेर → जैसलमेर → जोधपुर करणी माता, सम डेज़र्ट सफारी, उम्मेद भवन पैलेस, खास बाग
चरण 6 15-19 सितंबर कोटा → उज्जैन → इंदौर → बैंगलोर कोटा रिवरफ्रंट, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, बर्फानी बाबा आश्रम

प्रथम अध्याय: बैंगलोर से कोल्हापुर और मुंबई की ओर (29-30 अगस्त 2026)

29 अगस्त 2026: यात्रा का आगाज़ और कोल्हापुर महालक्ष्मी दर्शन

प्रातः 7:00 बजे होंडा सिटी कार से हमारी यह राजस्थान यात्रा पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ आरंभ हुई। कैब द्वारा सबसे पहले मैं नवरंग थिएटर पहुँचा, जहाँ मेरे मित्र शिवरतन अग्रवाल अपनी होंडा सिटी के साथ मेरा इंतज़ार कर रहे थे। हमने सामान गाड़ी में रखा और तुमकूर रोड से अपनी इस लंबी सड़क यात्रा की शुरुआत की। सुबह के समय काफ़ी ट्रैफ़िक था, लेकिन लगभग 9:00 बजे हम तुमकूर के पास पहुँच गए, जहाँ ‘कामधेनु होटल’ में हमने स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया।

इसके बाद सीरा की ओर बढ़ते हुए रास्ते में गाड़ी में डीज़ल डलवाया। मौसम बेहद सुहाना था—न ज़्यादा गर्मी और न ज़्यादा ठंड, बिल्कुल मध्यम जलवायु। चित्रदुर्गा पहुँचने पर वहाँ की पहाड़ियाँ और ऐतिहासिक ‘चित्रदुर्गा फोर्ट’ मन मोह लेता है। सात कोटद्वारों वाला यह प्रसिद्ध किला अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जिसके भीतर एक प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है। चित्रदुर्गा से आगे हुबली जाने के मार्ग पर एक रास्ता होसपेट की ओर और दूसरा दावणगेरे की ओर कटता है। हम हिरियूर होते हुए हुबली की ओर लगातार अग्रसर रहे। चार लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग इतना शानदार बना हुआ है कि गाड़ी पलक झपकते ही 100 की रफ़्तार पकड़ लेती है।

दोपहर करीब 2:00 बजे हम हुबली पहुँचे और वहाँ से बाईपास होते हुए धारवाड़ आईटी इंस्टीट्यूट के समीप ‘उडुपी होटल’ में दोपहर का भोजन किया। धारवाड़ का यह संस्थान वाकई अत्यंत सुंदर और भव्य है। इसके पश्चात बेलगावी होते हुए हम शाम करीब 6:00 बजे कोल्हापुर पहुँचे।

हमने पहले से आरक्षित होटल अल्बा प्रीमियर (3-स्टार) में कमरा लिया। यह होटल एक व्यस्त क्षेत्र में होने के बावजूद काफ़ी शांत और विशाल परिसर में फैला हुआ है। तरोताज़ा होने के बाद हम भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शुमार महालक्ष्मी मंदिर (अंबाबाई मंदिर) पहुँचे। यद्यपि वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई अलग कतार नहीं थी, परंतु मंदिर प्रशासन की व्यवस्था सराहनीय थी। उन्होंने एक बहुत सुंदर ‘मुखमंडप’ बना रखा था जहाँ बिना भीड़ के खड़े होकर लगभग 30 मीटर की दूरी से माता रानी के भव्य दर्शन हो जाते हैं। जो श्रद्धालु अत्यंत निकट से दर्शन करना चाहें, वे मुख्य कतार से जा सकते हैं (जहाँ लगभग 2 घंटे का समय लगता है)। थोड़ी ही दूरी पर राम दरबार और ठीक सामने अंजनैया स्वामी (हनुमान जी) का मंदिर भी स्थित है। हमने बड़ी श्रद्धा के साथ सभी के दर्शन किए, बाज़ार की छटा देखते हुए वापस होटल लौटे और वहीं रात्रि में चाइनीस डिनर का मज़ा लिया। (कुल दूरी: 650 किमी)

30 अगस्त 2026: कोल्हापुर से सपनों के शहर मुंबई तक

सुबह की चाय और नाश्ते से निवृत्त होकर हमने गूगल मैप की सहायता से कोल्हापुर के आस-पास के दर्शनीय स्थलों की जानकारी ली। गणेश मंदिर और कुछ अन्य मंदिरों के साथ-साथ 20 किलोमीटर दूर एक झील का भी सुझाव था, जो हमारे मुख्य राजमार्ग से काफ़ी दूरी पर होने के कारण हमने सीधे मुंबई के लिए रवाना होने का निर्णय लिया।

मौसम बेहद सुहाना बना हुआ था। पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रैफ़िक काफ़ी अधिक था और कई क्रॉसिंग होने के बावजूद एक्सप्रेसवे का अनुभव शानदार रहा। कई जगह गाड़ियाँ काफ़ी तीव्र गति से दौड़ रही थीं, फिर भी मुंबई पहुँचने में हमें लगभग 7 घंटे लग गए। रास्ते में पनवेल के पास ‘फूड प्लाज़ा’ में हमने लंच किया।

शाम 6:00 बजे हम द बाइक सूरज प्लाज़ा होटल पहुँचे। होटल की विशाल और भव्य लॉबी में 50-60 लोगों के बैठने के लिए सुंदर सोफे लगे थे और मध्य में भगवान शिव की एक आकर्षक प्रतिमा आगंतुकों का मन मोह रही थी। कमरा हमारा पहले से बुक था, इसलिए विश्राम करते ही सारी थकान दूर हो गई। (कुल दूरी: 375 किमी)


द्वितीय अध्याय: मुंबई के सी-लिंक से दमन और अहमदाबाद की संस्कृति तक (31 अगस्त – 1 सितंबर 2026)

31 अगस्त 2026: कोस्टल रोड, सी-लिंक और दमन का समुद्र तट

होटल में नाश्ता करने के बाद हमने चेक-आउट किया और बोरिवली में शिवरतन जी की बहन और बड़े भाई साहब के निवास पर पहुँचे। वे एक विशाल 62-मंजिला इमारत के 47वें फ्लोर पर ‘स्काई टॉवर’ में रहते हैं, जिसके नीचे ही एक भव्य ‘स्काई मॉल’ भी बना हुआ है। वहाँ कुछ समय बिताने के बाद हम वर्ली सी-लिंक रोड और वहाँ से वर्ली-नरीमन पॉइंट कोस्टल रोड की ओर बढ़े। यह इंजीनियरिंग का एक अद्भुत अजूबा देखने लायक था—पहले समुद्र के ऊपर से गुज़रने वाला सी-लिंक और फिर समुद्र के अंदर से होते हुए नरीमन पॉइंट तक जाने वाली सुरंगनुमा सड़क!

इस अद्भुत अनुभव के बाद हम वापस बोरिवली लौटे और वहाँ से दमन के लिए रवाना हुए। वापी से लगभग 5 किलोमीटर पहले दमन के लिए मुड़े। दमन की हमारी यह पहली यात्रा थी। इतिहास में पुर्तगालियों और डच लोगों द्वारा बसाया गया यह शहर गोवा ज्यूरिडिक्शन के अंतर्गत आता है। वर्तमान प्रशासक श्री प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में यहाँ अभूतपूर्व विकास हुआ है। समुद्र तट (बीच) के पास पर्यटकों के बैठने की सुंदर व्यवस्था, नाईट बाज़ार, आकर्षक लाइटिंग और बड़े-बड़े होटल इस क्षेत्र को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाते हैं।

हम प्राइड एलिट होटल में रुके। रात 11:30 बजे तक पर्यटकों की चहल-पहल से भरी यहाँ की नाईटलाइफ बहुत जीवंत लगी। ‘उत्सव होटल’ में डिनर के बाद मार्केटप्लेस में अनार और जामुन की प्राकृतिक आइसक्रीम का मज़ा लिया। हमारे मित्र संजीत बगड़िया ने हमें होटल तक छोड़ा।

1 सितंबर 2026: अहमदाबाद आगमन और मित्रों का स्नेह मिलन

अगली सुबह 8:00 बजे ब्रेकफास्ट के बाद हम संजीत बगड़िया जी की फैक्ट्री देखने गए। वहाँ गाड़ी में डीज़ल डलवाने के बाद उन्होंने हमें नेशनल हाईवे तक विदा किया। हम मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे के रास्ते अहमदाबाद के लिए बढ़े, परंतु भरूच के आगे एक सड़क दुर्घटना के कारण हमें लगभग 40 किलोमीटर पीछे लौटना पड़ा और फिर वैकल्पिक नियमित हाईवे से अहमदाबाद पहुँचे। रास्ते में फूड प्लाज़ा में भोजन किया।

अहमदाबाद में हमने प्रसिद्ध इका क्लब में कमरे लिए। शहर के बीचों-बीच विशाल भूभाग में फैला यह क्लब अपनी भव्यता और बेहतरीन फुटबॉल स्टेडियम के लिए जाना जाता है। उस रात स्टेडियम में मैच भी था, लेकिन हमारे स्नेही श्री भवानी शंकर जी के घर पर हमारे चार अन्य मित्र हमारा इंतज़ार कर रहे थे। भवानी शंकर जी हमें लेने स्वयं आए और हम सब डिनर के लिए निकले। रात 11:30 बजे तक आत्मीयता, गपशप और संगीत का दौर चलता रहा, जिसके बाद हम वापस इका क्लब लौट आए।


तृतीय अध्याय: तरंगा हिल, माउंट आबू और नाथद्वारा के पावन दर्शन (2-4 सितंबर 2026)

2 सितंबर 2026: तरंगा जैन तीर्थ, अंबाजी शक्तिपीठ और माउंट आबू

प्रातःकाल हम मेहसाणा रोड पर स्थित ऐतिहासिक तरंगा जैन मंदिर के दर्शन के लिए प्रस्थान किया (दूरी लगभग 130 किमी)। लगभग 850 वर्ष पूर्व वहाँ के महाराजा द्वारा निर्मित यह मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। भगवान अजीतनाथ जी की भव्य प्रतिमा के साथ-साथ अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ भी यहाँ विराजमान हैं।

इसके पश्चात, तरंगा हिल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत शक्तिशाली पीठ—जहाँ माता सती का हृदय गिरा था—उस माँ अंबा के पावन मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। ‘रामदेव होटल’ में भोजन उपरांत हम आबू रोड की ओर बढ़े और वहाँ से माउंट आबू की सर्पीली घुमावदार पहाड़ी सड़क तय करते हुए शाम करीब 5:00 बजे राजपूताना होटल पहुँचे। यह एक अत्यंत पुराना, पारंपरिक और सुंदर होटल है।

होटल में कमरा संभालने के तुरंत बाद, माउंट आबू में रहने वाले हमारे एक ज्योतिषी मित्र हमें लेने आए और हम सब अचलेश्वर महादेव मंदिर पहुँचे। अचलेश्वर मंदिर की कथा निराली है; यहाँ शिवलिंग की स्थापना नहीं है, बल्कि भगवान शिव के पाँव के अंगूठे का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि महर्षि वशिष्ठ के प्रयासों से इसी पावन स्थल पर माउंट आबू की पहाड़ी का संतुलन बना था।

3 सितंबर 2026: देलवाड़ा, गुरु शिखर, पावापुरी और नाथद्वारा

सुबह 9:00 बजे होटल चेक-आउट करने के बाद हमने देलवाड़ा जैन मंदिर, कात्यायनी शक्तिपीठ और गुरु शिखर के दर्शन किए। इसके पश्चात हम वहाँ से लगभग 75-80 किमी दूर पावापुरी तीर्थ स्थल पहुँचे। पार्श्वनाथ भगवान का यह विशाल मंदिर और इसके पीछे स्थित भगवान महावीर का जल मंदिर अद्भुत वास्तुकला का प्रमाण है।

सिरोही होते हुए ‘बाबा रामदेव होटल’ में दोपहर का भोजन किया और वहाँ से नाथद्वारा के लिए प्रस्थान किया। शाम करीब 5:30 बजे हम होटल शुभ पहुँचे, जो कि एक विशाल शिव प्रतिमा (विश्वास स्वरूपम) के ठीक पीछे स्थित है।

होटल शुभ नाथद्वारा कमरा और स्नानघर
चित्र: नाथद्वारा के होटल शुभ में आरामदायक कमरे और आधुनिक स्नानघर की झलक

4 सितंबर 2026: श्रीनाथजी के दिव्य दर्शन और झीलों की नगरी उदयपुर

प्रातः 7:00 बजे हम ऑटो द्वारा श्रीनाथजी के दर्शन के लिए निकले, किंतु ज्ञात हुआ कि जन्माष्टमी के महापर्व के कारण दर्शन प्रातः 10:00 बजे से आरंभ होंगे। हम वापस होटल लौटे, नाश्ता किया और 9:30 बजे पुनः मंदिर पहुँचे। श्रीनाथजी की असीम कृपा से हमें विशेष दर्शन टिकट मिल गए और मात्र आधे घंटे में हमने प्रभु के अलौकिक एवं आकर्षक दर्शन प्राप्त किए।

उदयपुर पहुँचकर हमने होटल पारस महल में कमरा लिया। दोपहर 2:00 बजे के बाद जन्माष्टमी की भारी भीड़ और पर्यटकों के भारी उत्साह के बीच हम सिटी पैलेस देखने निकले। रास्ते में होटल जमजम में लंच किया। रात 8:00 बजे के करीब होटल लौटने से पहले हम पिछोला झील के तट पर पहुँचे जहाँ प्रसिद्ध चाट-पकौड़ी का भरपूर लुत्फ उठाया।


चतुर्थ अध्याय: चित्तौड़गढ़ का वैभव, उदयपुर की झीलें और शेखावाटी का आंचल (5-9 सितंबर 2026)

5 सितंबर 2026: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का शौर्य और विजय स्तंभ

सुबह होटल में ब्रेकफास्ट के बाद हम डबोक एयरपोर्ट (उदयपुर) पहुँचे और हमारे मित्र कृष्ण कुमार अग्रवाल (जो बैंगलोर से हमारे इस सफर में शामिल होने विशेष रूप से आए थे) को पिक किया। वहाँ से हम सीधे चित्तौड़गढ़ के लिए रवाना हुए।

चित्तौड़गढ़ का किला भारत का सबसे विशाल किला है, जिसके परिसर के भीतर ही लगभग 5,000 लोग निवास करते हैं। किले के विशाल सुरक्षा द्वारों को ‘पाल’ कहा जाता है। हमने वहाँ कई प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक महल और भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक ‘विजय स्तंभ’ के दर्शन किए। रात्रि 9:00 बजे हम वापस उदयपुर पारस होटल पहुँचे, जमजम होटल में डिनर किया और जगदीश मंदिर में शीश नवाया।

6 सितंबर 2026: पिछोला झील बोटिंग और लक्ष्मणगढ़ की ओर

अगले दिन नाश्ते के बाद होटल से चेक-आउट कर हम एक बार फिर सिटी पैलेस पहुँचे। वहाँ से बोट की सवारी करते हुए जग मंदिर, लेक पैलेस और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के मनमोहक नज़ारे देखे। तदुपरांत राजसमंद झील के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हुए हम सीकर के रास्ते लक्ष्मणगढ़ पहुँचे, जहाँ हमने अगले 3 दिनों के लिए होटल बुक कर रखा था।

7 सितंबर 2026: रेवासा धाम, जीण माता और खाटूश्यामजी

सुबह नाश्ता करके हम रेवासा पहुँचे जहाँ महान गोसेवक पूज्य राजेंद्र दास जी महाराज के पावन दर्शन किए। इसके उपरांत जीण माता और फिर लखदातार खाटूश्यामजी के धाम पहुँचे। महाराज श्री पुरुषोत्तम शर्मा जी की विशेष कृपा और स्नेहपूर्ण सहायता से हमें अत्यंत सुगमता और शांति से बाबा श्याम के दर्शन प्राप्त हुए।

खाटूश्यामजी मंदिर गर्भगृह दर्शन सतीश जी
चित्र: पावन मंदिर के गर्भगृह के समक्ष श्रद्धापूर्वक शीश नवाते सतीश जी

8 सितंबर 2026: सालासर बालाजी और शाकंभरी माता

अगले दिन श्री सालासर धाम पहुँचे और सालासर वाले दाढ़ी-मूंछ वाले प्रसिद्ध बालाजी महाराज के दर्शन किए। मंदिर के मुख्य पुजारी रामू जी और उनके सहयोगी श्री आलोक जी ने बड़े भाव और आदर से दर्शन करवाए। वहीं बालाजी के बालभोग का दिव्य प्रसाद ग्रहण किया तथा भक्त प्रवर संत मोहनदास जी की समाधि के दर्शन किए। इसके बाद सीकर लौटकर हमने शाकंभरी माता के शक्तिपीठ में हाजिरी लगाई।

9 सितंबर 2026: शेखावाटी की हवेलियाँ, झुंझुनू धाम और बीकानेर

प्रातः 10:00 बजे होटल पोर्ट व्यू, लक्ष्मणगढ़ से चेक-आउट किया। हाईवे पर स्थित एक पारंपरिक हवेली में नाश्ता करने के बाद हम शिवरतन जी के मित्र के फार्म हाउस ‘रामदुलारी बगीची’ पहुँचे, जहाँ शुद्ध दूध, ताज़ी मलाईदार छाछ और सफेद मक्खन का देसी स्वाद लिया।

फतेहपुर के प्राचीन मंदिरों के दर्शन करते हुए हम नवलगढ़ पहुँचे, जहाँ शेखावाटी की भित्तिचित्रों वाली एक ग्रैंड हवेली में दोपहर का भोजन किया। शाम को झुंझुनू में श्री रानी सती दादी मंदिर, 56 भोग मंदिर, बाबा गंगाराम धाम और माता गायत्री देवी के पावन दर्शन किए। रात्रि में हम बीकानेर के ऐतिहासिक सादुल पैलेस (क्लब परिसर) पहुँचे।


पंचम अध्याय: बीकानेर का रणबांकुरों का इतिहास, जैसलमेर की मरुधरा और जोधपुर की शान (10-14 सितंबर 2026)

10 सितंबर 2026: जूनागढ़ किला, करणी माता (देशनोक) और स्वर्ण नगरी जैसलमेर

सादुल क्लब में सुबह के नाश्ते के बाद ऐतिहासिक बीकानेर दुर्ग (जूनागढ़ किला) का भ्रमण किया। इसके बाद चूहों वाली देवी के रूप में विश्वविख्यात करणी माता मंदिर (देशनोक) के दर्शन कर जैसलमेर के लिए मरुस्थलीय मार्ग पर प्रस्थान किया। रात 9:00 बजे स्वर्ण नगरी जैसलमेर पहुँचकर होटल सोनम निवास में विश्राम किया।

11 सितंबर 2026: सम के रेतीले धोरे, जीप और कैमल सफारी

प्रातः होटल में नाश्ता करने के बाद ऑटो द्वारा जैसलमेर शहर के भ्रमण पर निकले। मंदिर पैलेस, नक्काशीदार हवेलियों और ऐतिहासिक गड़ीसर झील के विहंगम दृश्य देखे। चाइनीस रेस्टोरेंट में लंच करने के बाद हम सीधे सम विलेज (डेजर्ट सफारी) के लिए रवाना हुए।

हेरिटेज कैंप में ठहरकर हमने थार के तपते रेतीले धोरों पर रोमांचक जीप सफारी, क्वाड बाइक राइड और पारंपरिक कैमल राइड (ऊँट की सवारी) का भरपूर आनंद लिया। शाम को सूर्यास्त का स्वर्णिम नज़ारा अद्भुत था। कैंप में रात को राजस्थानी लोक कलाकारों की कालबेलिया प्रस्तुति, लोकगीत और पारम्परिक राजस्थानी भोजन के साथ तारों भरी मरुस्थलीय रात्रि का आनंद लिया।

12-14 सितंबर 2026: सूर्यनगरी जोधपुर, उम्मेद भवन और विंटेज कार्स

12 सितंबर: हेरिटेज कैंप में चाय-नाश्ता कर हम अपनी होंडा सिटी कार से जोधपुर के लिए रवाना हुए और शाम को जोधपुर क्लब पहुँचकर विश्राम किया।

13 सितंबर: जोधपुर क्लब से नाश्ता करने के उपरांत हम होटल रैडिसन पहुँचे, जहाँ हमारे मित्र नीरज छाबरा ने हमारे लिए व्यवस्था कर रखी थी। दिन में हम रिसोर्ट के लिए उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर देखने स्थानीय कारखानों में गए और उद्योग स्वामियों के साथ दोपहर का भोजन किया।

14 सितंबर: फर्नीचर कारखानों में आवश्यक ऑर्डर फाइनल करने के बाद हम जोधपुर के मशहूर हेरिटेज रेस्टोरेंट खास बाग पहुँचे। यहाँ राजा-महाराजाओं के ज़माने की ऐतिहासिक विंटेज कारों का बेजोड़ संग्रह प्रदर्शित है। शुद्ध शाकाहारी भोजन और फोटोग्राफी के बाद हम विश्वप्रसिद्ध उम्मेद भवन पैलेस देखने गए।


षष्टम अध्याय: कोटा रिवरफ्रंट, महाकाल की नगरी उज्जैन, इंदौर और बैंगलोर वापसी (15-19 सितंबर 2026)

15 सितंबर 2026: चंबल का गौरव—कोटा रिवरफ्रंट

होटल चेक-आउट करने के बाद कृष्ण जी और नीरज जी को मेहरानगढ़ किले के पास भावभीनी विदाई दी और हम कोटा के लिए रवाना हुए। शाम को हम कोटा के नवनिर्मित एवं विश्वस्तरीय चंबल रिवरफ्रंट पहुँचे। रंग-बिरंगे संगीत फव्वारे, मनमोहक लेजर लाइटिंग और शाही बग्गी की सवारी ने कोटा के इस आधुनिक स्वरूप को अविस्मरणीय बना दिया।

16 सितंबर 2026: झालावाड़ सूर्य मंदिर, उज्जैन महाकाल और इंदौर

झालावाड़ के प्राचीन सूर्य मंदिर के दर्शन करते हुए दोपहर 4:00 बजे हम अवंतिका नगरी उज्जैन पहुँचे। भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के वीआईपी प्रवेश द्वारा अत्यंत दिव्य और शांत दर्शन हुए। इसके बाद उज्जैन के क्षेत्रपाल भगवान काल भैरव और दत्तात्रेय अखाड़ा मंदिर के दर्शन कर हम रात्रि में इंदौर पहुँचे और द बाइक लैंडमार्क होटल में विश्राम किया।

17 सितंबर 2026: बर्फानी बाबा आश्रम, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा सम्मान और औरंगाबाद

सुबह नाश्ते के बाद होटल के समीप स्थित बर्फानी बाबा के विशाल आश्रम पहुँचे, जहाँ बाबा की समाधि और माँ त्रिपुरासुंदरी देवी के दिव्य दर्शन किए। इसके पश्चात, ऑल इंडिया अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी श्री कुलभूषण जी मित्तल ने हमें अपने निज निवास पर आमंत्रित किया। उन्होंने हमारा अत्यंत आत्मीय आदर-सत्कार किया और स्मृति स्वरूप चाँदी का दीपक भेंट कर हमारा अभिनंदन किया।

इंदौर से प्रस्थान कर हम देर शाम महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपती संभाजीनगर) पहुँचे और ‘द ऑरेंज फ्लैग रेणुका होटल’ में रात्रि विश्राम किया।

18-19 सितंबर 2026: सोलापुर, बीजापुर और सकुशल बैंगलोर वापसी

18 सितंबर: सोलापुर में दोपहर का भोजन किया और गणेशोत्सव के चलते सजे बाज़ारों की रौनक देखी। शाम को ऐतिहासिक नगर बीजापुर (विजयपुरा) पहुँचे, जहाँ स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आनंद लिया।

19 सितंबर: सुबह विजयपुरा से अपनी भरोसेमंद होंडा सिटी कार से बैंगलोर के लिए प्रस्थान किया। मार्ग में चित्रदुर्गा में दोपहर का भोजन किया और रात्रि लगभग 7:30 बजे हम सकुशल अपने घर बैंगलोर पहुँच गए।

सफरनामा का सार

इस प्रकार, 22 दिनों की यह सुदीर्घ सड़क यात्रा कुल 4,000 से अधिक किलोमीटर का फासला तय करते हुए पूर्ण हुई। शक्तिपीठों की असीम कृपा, महाकाल और बाबा श्याम का आशीर्वाद, थार मरुस्थल का सम्मोहन और सच्चे मित्रों का आत्मीय साथ—इस सफर की हर एक सांस स्मृति के पन्नों पर हमेशा के लिए अंकित हो गई है।

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